‘চুনী হার্টের রোগ প্রতিরোধক’ আনন্দবাজারে প্রকাশিত বিজ্ঞাপন-এর বিরুদ্ধে প্রতিবাদ

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10 Responses to “‘চুনী হার্টের রোগ প্রতিরোধক’ আনন্দবাজারে প্রকাশিত বিজ্ঞাপন-এর বিরুদ্ধে প্রতিবাদ”

  1. Santosh Sharma 12 August 2014 at 9:03 PM #

    तंत्रमंत्र , जादूटोना , झाड़फूंक , चमत्कार आदि से किसी भी बीमारी से छूटकारा दिलाने का दावा करना कानूनन अपराध है। औषध एवं प्रसाधन अधिनियम १९४० तथा औषधि एवं चमत्कारी उपचार आक्षेपाई विज्ञापन अधिनियम १९५४ के तहत जादूई चिकत्सा करने वाले को जेल व जुर्माना हो सकता है। लेकिन आज भी इस पश्चिम बंगाल में उक्त कानूनों को ठेंगा दिखाते हुए अनेक तथाकथित चमत्कारी बाबाओं , तांत्रिकों , ओझाओं , ज्योतिषियों की अलौकिक या ईश्वरीयशक्ति द्वारा बीमारी से छूटकारा दिलवाने का धोखाधड़ी धंधा धड़ल्ले से चल रहा है।

  2. Santosh Sharma 12 August 2014 at 9:03 PM #

    औषधी एवं चमत्कारी ( आक्षेपाई विज्ञापन ) अधिनियम , १९५४

    यह कानून दवाओं के संबंध में भ्रामक विज्ञापन , कुछ रोगों तथा विकारों के उपचार के लिए चमत्कारिक गुण रखने तथा उपाय बताने वाले विज्ञापनों को प्रतिबंधित करता है। इस कानून का उल्लंघन करने वाले को कारावास का दंड देने का प्रावधान है। जो ६ माह की अवधि अथवा अर्थ दंड अथवा दोनों सहित बढ़ाया जा सकता है। दोबारा अपराध करने की स्थिति में एक वर्ष का कारावास या अर्थदंड आय दोनों दिए जा सकते है।

    सवाल है कि क्या सूचना एवं शिकायत मिलने के बाद ही पुलिस व प्रशासन इस पाखंडी धंधे को कानूनन बंद करने के लिए कदम उठाएगी ?

  3. Santosh Sharma 12 August 2014 at 9:04 PM #

    अन्धविश्वास , तंत्रमंत्र , झाड़फूंक , ओझा – तांत्रिक एवं इनके कारनामों के खिलाफ आन्दोलन करने वाली संस्था भारतीय विज्ञान व युक्तिवादी समिति के अध्यक्ष प्रबीर घोष ने कहा कि औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम , १९४० के तहत किसी भी तरह की बीमारी को झाड़फूंक , तंत्रमंत्र से इलाज का दावा करना जुर्म मन जाता है। अगर किसी ओझा , तांत्रिक , बाबा ऐसा दावा करते हैं तो उन्हें उक्त कानून के तहत सजा हो सकती है।

  4. Santosh Sharma 12 August 2014 at 9:04 PM #

    भारतीय विज्ञान व युक्तिवादी समिति के अध्यक्ष प्रबीर घोष ने कहा कि अन्धविश्वास के जाल में अनपड़ ही नहीं बल्कि पड़े- लिखे लोग भी फंसे हुए हैं। अन्धविश्वास देश के विकाश में बरा रूकावट है। इसके चक्कर में लोग आर्थिक एवं सामाजिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। हम २१ वीं सदी में जी रहे हैं। यह युग विज्ञान का है। लेकिन विभिन्न टीवी चैनलों पर कवच , सिद्ध माला , सिद्ध अंगूठी , धन प्राप्ति यंत्रो का व्यापक अन्धविश्वास के नाम पर चल रहा है। जिसका खतरनाक प्रभाव देश के भविष्य करोड़ों बच्चों पर पड़ रहा है। टोटका , भूत- प्रेत , डायन , तंत्र- मन्त्र आदि कमजोर दिमाग की उपज है।

  5. Madhusudan Mahato 13 August 2014 at 11:59 AM #

    Many thanks to Dwijapada Bouri.

  6. sujoy chanda 16 August 2014 at 7:22 PM #

    well done Dwijapada da!!!

  7. biplab das 17 August 2014 at 7:50 AM #

    very good step

  8. asok kumar das 24 August 2014 at 8:01 AM #

    I support Mr. Bauri and all such other rational people who are devoted for human welfare.But I fill it is my duty if I notice any technical wrongs in their activity. . In this case we, in fact cannot take any legal action towards the advertiser. In the list of diseases for which the magic remedies magic remedies are prohibited, heart disease is not unfortunately listed under Drug and Magic Remedies Act 1954. While passing a Government Order on behalf the Government in 2001/02 in case of a yotishi I recommended to enlist all diseases to bring under the ambit of the act. However it was not a part of my original. order. We should move so that the Parliament amend the act accordingly. But I am sorry to find that the the government who are followers of the philosophy of the less civilised ancient world may delete the law itself to promote the immoral practice of yotish, gunin, gyanguru etc. etc.

  9. boots australian 24 September 2014 at 11:07 AM #

    One of the best wedding decisions we made was to have a Flickr account for guests to upload their photos. I made some business cards through Vistaprint for really cheap and our wedding coordinator put them at each guest’s seat. Front of the business card; back was directions to the website
    I remember other bees saying they didn’t get a whole lot of photos, but I think putting them at each seat really helped with the amount we received.
    Almost all of these next pictures come from gues

  10. asok kumar das 5 October 2014 at 11:55 AM #

    Mr. Australian has put his boots in wrong place. This is not a site to make an advertisement for business. To insert a business advertisement avoiding payment is a criminal and moral offence. I request SRAI to forward my comment to Mr. Australian and to wipe out his 24th september advertisement from the website
    asokdas charbak


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