হিউম্যানিস্টস অ্যাসোসিয়েশন –এর কেন্দ্রীয় কমিটির বার্ষিক সম্মেলনে পেশ করা সম্পাদকীয় প্রতিবেদন

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5 Responses to “হিউম্যানিস্টস অ্যাসোসিয়েশন –এর কেন্দ্রীয় কমিটির বার্ষিক সম্মেলনে পেশ করা সম্পাদকীয় প্রতিবেদন”

  1. asit guin 9 March 2014 at 8:00 PM #

    Please collect the data regarding number of farmers in Bengal and area of cultivable land available. Per capita land for the farmers is clear proof that Bengal can no longer support this many farmers by this much land. So, half of the farmers have to change profession and one percent of the farming land has to sacrifice for industries. Left front’s action in detail may need revision, but their overall policy is mathematically correct. There was no farmer suicide in Bengal in last 34 years. Who will explain it? The 34 years is the story of Bengal success in agriculture. When govt initiated the process of industrialization based on agri-success, enemies of Bengal spoiled it.

  2. Satoths Sharma 10 March 2014 at 9:09 PM #

    युक्तिवादी समिति का २९वां सम्मलेन संपन्न
    संतोष शर्मा

    भारतीय विज्ञान व युक्तिवादी समिति अध्यक्ष प्रवीर घोष ने कहा कि तंत्रमंत्र, झाड़फूंक, जादू-टोना जैसे अंधविश्वास की रोकथाम के लिए देश में मौजूदा द ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, १९४० और द ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (ऑब्जेक्सनाबल एडवर्टिगमेंट ) एक्ट, १९५४ को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। समिति की ओर से विभिन्न समय पर उक्त कानूनों का इस्तेमाल करके ज्योतिष, तांत्रिक, तथाकथित बाबाजी और माताजी को जेल की हवा भी खिलायी गयी है। लेकिन आम लोगों में उक्त कानून के बारे में विशेष जानकारी नहीं है। इसलिए समिति की ओर से आगामी दिनों आम लोगों में उक्त कानून के बारे में जागरूकता फ़ैलाने का कम जायेगा।श्री घोष रविवार को युक्तिवादी समिति द्वारा दमदम के यशोहर रोड स्थित पी एंड टी कम्युनिटी हॉल में आयोजित दो दिवसीय २९वें सम्मलेन को संबोधित कर रहे थे।
    समिति की तरफ से नाट्यकार गौतम मुखर्जी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
    इस अवसर पर ह्युमैनिस्ट्स एसोसिएशन की कार्यकारी अध्यक्ष सुमित्रा पद्मनाभन ने कहा कि बंगाल में खासकर आदिवासी समाज में आज भी तथाकथित डायन के नाम पर महिलाओं को मौत के मुंह में ढकेल दिया जाता है।
    डायन जैसे अंधविश्वास को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए सिर्फ क़ानूनी तौर पर ही नहीं बल्कि आदिवासी समाज का आर्थिक और सामाजिक रूप से विकास भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह ख़ुशी की बात है कि इस अंधविश्वास के खिलाफ लोगों में जागरूकता फ़ैलाने के लिए प्रदेश सरकार के विज्ञान व तकनीकी विभाग द्वारा युक्तिवादी समिति के सहयोग में एक डॉक्युमेंटरी फिल्म बनायी गयी है।
    इस मौके पर समिति के महासचिव बिप्लव दास और एसोसिएशन के महासचिव संजय कर्मकार ने कहा कि समाज को अंधविश्वास से मुक्त करने के लिए स्कूली स्तर से ही छात्रों में जागरूकता फैलायी जानी चाहिए। साथ ही प्रदेश सरकार से मांग की गयी कि स्कूल पाठ्यक्रम में युक्तिवाद संबंधी विषयों को शामिल किया जाए।
    इस सम्मलेन में विभिन्न जिलों और प्रदेशों से करीब १०० प्रतिनिधि आये थे।इस मौके पर लेखिका कृष्णा बासु, सत्यजीत चटर्जी, अरिंदम भट्टाचार्ज, डॉ नेहा गुप्ता, सुदीप चक्रवर्ती, अनबिल सेनगुप्त, सोमिंद्र घोष, जयदीप मुखर्जी, दिलीप मंडल और संतोष शर्मा ने सक्रिय भूमिका निभायी।[कलयुग वार्ता : कोलकाता , सोमवार , ३ मार्च २०१४ ]

  3. Rana 19 March 2014 at 7:24 PM #

    Pratibedan khub valo legeche

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