Adra Branch Remembering Sunil Gangopadhyay:A Grand Evening Presenred by HA and SRAI

Adra Branch Remembering Sunil Gangopadhyay on 10.11.12:A Grand Evening Presenred by HA and SRAI

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7 Responses to “Adra Branch Remembering Sunil Gangopadhyay:A Grand Evening Presenred by HA and SRAI”

  1. joygopal 12 November 2012 at 6:40 PM #

    a many pointed star gone

  2. A K Bairagi 13 November 2012 at 10:35 AM #

    amar jibito kaler modhye ekjon sera sahityiker mrityu te ami sotyi shokahoto.

    onke niye ami r ki bolte pari? ami r kototuku onar lekha porechi?

    adra Branch er ei udyog ke ami sadhubad janai. antorik ovinandan roilo.

  3. biplab das 13 November 2012 at 11:44 PM #

    khub i ruchishil proyas chilo adra brancher…..

  4. Madhusudan Mahato 15 November 2012 at 4:53 PM #

    Darun kaj karchhe Adra. Sabaike Dipabali o Vaifotar suvechchha janai.

  5. santosh sharma 15 November 2012 at 11:55 PM #

    साहित्यकार सुनील गंगोपाध्याय को श्रद्धांजलि

    पुरुलिया, 12 नवम्बर (नि प्र.) 1 भारतीय विज्ञानं व युक्तिवादी समिति एवं ह्यूमेनिस्ट असोसिएसन के संजुक्त कार्यक्रम में बंगाल के मशहूर लेखक तथा साहित्यकार सुनील गंगोपाध्याय को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. संगठन की ओर से पुरुलिया के स्थित आद्र नार्थ इंस्टीच्यूट हाल में गत शनिवार को इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में युक्तिवादी समिति के महासचिक विप्लव दास ने कहा कि साहित्यकार सुनील गंगोपाध्याय समिति के एक सलाहकार ही नहीं बल्कि संस्था के पशुबलि विरोधी जैसे अनेक अन्दलोनों में सक्रिय भूमिका निभाए थे . स्व: गंगोपाध्याय एक नास्तिक तथा युक्तिवादी विचारधारा के इंसान थे. उनका मानना था कि पुनर्जन्म एक काल्पना है मात्र. इंसान अपने महान कार्यों से हमेशा के लिए इस जगत में जीवित रहते है ह्यूमेनिस्ट. असोसिएसन के उपाध्यक्ष सत्यजीत चटर्जी, शीला सर्कार, फिरोजा बेगम, जयंती लाहिड़ी, चंचल दुबे पियासी उपस्थित थे.
    सूत्र: 12 नवंबर 2012 दैनिक विश्वामित्र: संवादाता: संतोष शर्मा

  6. santosh sharma 15 November 2012 at 11:57 PM #

    महान दान है मृत्यु पश्चात् नेत्रदान व देहदान
    संतोष शर्मा
    महान साहित्यकार सुनील गंगोपाद्याय बँगला साहित्य को अलविदा कार तो गए मगर उनकी अंतिम इच्छा देहदान अधूरी रह गयी. बंगला साहित्य के मशहूर लेखक सुनील गंगोपाद्याय एक साहित्यकार ही नहीं बल्कि एक तर्कवादी, नास्तिक तथा पुनर्जन्म में अविश्वासी थे. उनका मानना था कि जन्म और मृत्यु के बीच मिली यह जिन्दगी दोबारा नहीं मिलती है धरती. पर इन्सान का सिर्फ एक बार ही जन्म होता है. मृत्यु के पश्चात् इन्सान का फिर जन्म नहीं होता है. मृतु के पश्चात् इन्सान का पुनर्जन्म एक कल्पना मात्र है . अपनी पूरी जिंदगी साहित्य की नयी – नयी सृष्टि में निछावर करने वाले सुनील गंगोपाध्य की अंतिम इच्छा थी कि मृत्यु के पश्चात् उनका नश्वर देह दान कर दिया जाय. मगर उनकी यह इच्छा परिवार के विरोध के कारण अधुरी रह गयी और शारीर का अंतिम सत्कार कर दिया गया. यह घटना एक उदाहरण सी है मगर. आज पियासी इस धरती पर इस तरह की घतानाये समय के साथ हो रही है. एक नास्तिक, तर्कवादी विचारधारा के व्यक्ति मृत्यु से पहले देहदान या नेत्रदान के लिए शपथ पात्र लिख कर रखते है. लेकिन मृत्यु के बाद उस शपथ को पात्र नजर अंदाज करते है उसी व्यक्ति के परिवारवाले. इसके पीछे शायद पुनर्जन्म जैसा अन्धविश्वास उस परिवारवालों पर छाया रहता है. अन्धविश्वास यह है कि पुनर्जन्म में विश्वासी लोग यह सोचते है कि यदि मृत्यु के बाद देहदान या नेत्रदान कर दिया तो दुसरे जन्म में उन्हें नेत्रहिन या अपंग होकर जन्म लेना पड़ेगा इस. विषय में भारतीय विज्ञान व उक्तिवादी समिति के अध्यक्ष प्रबीर घोष ने कह कि इन्सान की पुनर्जन्म एक कल्पना मात्र है. हिंदु धर्म में पुनर्जन्म का विश्वास बना हुआ है जबकि ईस्सई और इस्लाम धर्म में पुनर्जम का अविश्वास कायम है साहित्यकार सुनील गंगोपाद्याय जैसे लोग अपने अनमोल कार्यो, सृष्टि, रचना से मृत्यु के बाद पियासी हमारे मन – मष्तिष्क में बने हुए है विज्ञानं के नए – नए अविष्कार से यह सिध्य हो गया है कि सिर्फ इन्सान ही नहीं बल्कि इस धरती पर जन्मे हर प्राणी का केबल एक बार ही जन्म होता है. इसलिए इन्सान को पुनर्जम जैसे अन्धविश्वास से मुक्त होकर देहदान व नेत्रदान जैसे महान कार्य के प्रति उत्साहित होना चाहिए नेत्रदान. से अंधे को इस धरती की सुन्दरता देखने का मौका मिल सकेगा.

  7. Profile photo of Sumitra Padmanabhan
    sumitra di 21 November 2012 at 12:40 PM #

    Wonderful job by Adra branch… initiative by Satyajit Chatterjee. Abhinandan. Audience er ekta photo thakle bhalo hoto. Ar baire gate er kachh theke ekta.

    Amra khub miss korlam


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